दुआओं में सबके

दुआओं में सबके है आना जाना
क्या मेरा क्या तुम्हारा ठिकाना
 
सपनों में आना यादों में मिलना
बस छोटा-सा है, हमारा घराना
 
सस्ती है यहाँ जान हमारी-तुम्हारी
बाकी तो है मंहगाई का ज़माना
 
सब तो हैं हमसे खफा-खफा से
हम बनायें कहाँ अपना आशियाना
 
कलई खुल गई कारगुजारियों की
क्या है तुम्हारा अब नया बहाना
 
हमें सब पता है, साजिशें तुम्हारी
उसूल है हमारा सबसे निभाना
 
नादिर चिरागों को रोशन कर दो
रोशनी में ढूंढेंगे अपना ठिकाना

Leave a Reply