कल नक़ाब उतर जाये उनका , जो आज हम दम हो रहे है….

अरे संभालो यारों ! 

हंसी ज़िन्दगी के दिन कम हो रहे है ,
बेशकीमती लम्हे ख़ुशी से तब्दील हो कर ग़म हो रहे है..

काजल भरी आँखों  में नूर था कभी, 
आज क्यूँ उजाले मध्यम हो रहे है ? 
बेख़ुदी में ख़ुद के सिक्के चले थे कभी, 
आज तो ख़ुद माध्यम हो रहे है…

किसी के यकीन में , ज़िन्दगी ना खोना अपनी.. 
क्या पता कल नक़ाब उतर जाये उनका , 
जो आज हम दम हो रहे है.. 
   अरे संभालो यारों ! 
हंसी ज़िन्दगी के दिन कम हो रहे है…..
बेशकीमती लम्हे ख़ुशी से तब्दील हो कर ग़म हो रहे है..
                                                                                        kajal sky…..

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