संसार/ निष्कर्ष

 

तुझे चाहने से पहले ,

अन्जाना था जमाने की शर्तों से |

 

अब कभी ढूंढता हूँ तुझे ,

रूढीयों के बाजार में |

 

तेरी रूह तक छिप जाती है ,

इस जटिल संसार में |

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