बौड़म जी बस में

बस में थी भीड़

और धक्के ही धक्के,

यात्री थे अनुभवी,

और पक्के।

पर अपने बौड़म जी तो

अंग्रेज़ी में

सफ़र कर रहे थे,

धक्कों में विचर रहे थे।

भीड़ कभी आगे ठेले,

कभी पीछे धकेले।

इस रेलमपेल

और ठेलमठेल में,

आगे आ गए

धकापेल में।

और जैसे ही स्टॉप पर

उतरने लगे,

कंडक्टर बोला-

ओ मेरे सगे!

टिकट तो ले जा!

बौड़म जी बोले-

चाट मत भेजा!

मैं बिना टिकिट के

भला हूँ,

सारे रास्ते तो

पैदल ही चला हूँ।