नफरत की आग ने यूँ दिलों जाँ जला दिया !

                      
नफरत की आग ने यूँ दिलों जाँ जला दिया !
लोगो ने एक इंसा  को  शैतां  बना दिया!!

जामें  वफ़ा  पे खींच  पत्थर चला दिया  !
उनकी जफ़ा ने आँख से पर्दा हटा दिया !!

वो और होगे जिनको मिलाया है ख़ाक़ में !
हमको तो ठोकरों ने हसीतर बना दिया!!

देखा गया न आँख में मासूमियत का रंग !
जो कैद परिंदे थे हवा में उड़ा दिए दिया !!

उसके हँसीं लिवास पे इक दाग़ क्या लगा !
सारा गुरूर  खाक़  में उसने मिला दिया !!

जो ज़ख्म  खाके  भी है रहा आपका सदा !
उस दिल पे फिर से आपने खंज़र चला दिया!!

अपना समझ के किस से”रज़ा”दिल मिलाइए !
जिस से मिलाया हाँथ उसी ने दगा दिया !!

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  शायर सलीम रजा
                        २२ सितम्बर २०१२