बता तेरा मेरा हिसाब क्या है….

सवाल क्या है जवाब क्या है ,
बता तेरा मेरा हिसाब क्या है ,

जुर्म-ए-मुहब्बत तो कर लिया ,
बता ईस में अब अज़ाब क्या है ,

तेरे लब तो मय के प्याले हैं ,
अब ईस के आगे गुलाब क्या है ,

तेरा दीवाना मुझे कहती है दुनिया ,
अब ईस से बड़ा खिताब क्या है ,

माँ की खिदमत करता रहे तो ,
अब ईस से ज्यादा सवाब क्या है ,

एक लज़ीज़ सा किस्सा हूँ मैं भी ,
हमें पढ़ लिया फिर किताब क्या है ,

मिलना था जो मिल गया ‘शादाब’ ,
उदासी का मगर असबाब क्या है !!

2 Comments

  1. नादिर अहमद nadir 22/09/2012
    • shadab shadab azimabadi 23/09/2012

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