मैं नींद में भी तेरा नाम लेता हूँ…..

जब दिल से अपने मैं कोई काम लेता हूँ ,
तो उम्मीद का दामन थाम लेता हूँ ,

कुछ ईस तरह से मैं इनाम लेता हूँ ,
दुआएं लेकर लफ़्ज़ों का दाम लेता हूँ ,

कहते हैं मेरे घर वाले रात को अक्सर ,
मैं नींद में भी तेरा नाम लेता हूँ ,

आती है तेरे शहर की खुशबु लिए हुए ,
मैं सबा से अक्सर तेरा पयाम लेता हूँ ,

तुझे रुसवाइयों से बचाने की खातिर आज ,
मैं अपने सर पे इश्क़-ए-इल्ज़ाम लेता हूँ ,

संभालेगा खुदा भी मुझे ये सोच कर ,
गिरते हुए को हमेशा थाम लेता हूँ ,

तेरा ही चेहरा है हर पैमाने में यहाँ ,
यही देखने को हाथों में जाम लेता हूँ ,

शब्-ओ-रोज़ बैठ रात की रानी के साए में ,
बिन छुए उसकी खुशबु तमाम लेता हूँ ,

यही उसूल है मेरा यही ख़ुलूस है मेरा ,
अदब पेश कर के सबका सलाम लेता हूँ !!

2 Comments

  1. arpit sharma 15/10/2012

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