एक बार जो की मुहब्बत मैंने, अब दुबारा नहीं होती….

अब सपनों में नहीं खोती, और बैचेन हो कर नहीं सोती, 

सच कहूँ तो एक बार जो की मुहब्बत मैंने, 
अब दुबारा नहीं होती…. 

वो तितली सा उड़ना और तमाम अहेसासात कर लिए हमने,
सच कहूँ तो अब बहाने से टहेलने बागानों में नहीं जाती..
वो दुश्मनों के देखने का डर, और बहुत देर से पहोचना घर, 
सच कहूँ तो अब बात बनाकर बात-बात में झूठ नहीं बोल पाती..

वो बाज़ारों में बहाने से आना-जाना, और छोटी-छोटी बातों में रूठना-मनाना ,
सच कहूँ तो अब पानी के बहाने सहेलियों संग पनघट नहीं जाती… 
वो अख़बारों से तेरा नाम काट, क़िताबों में लगाना,
और तेरी दी हुई भेटों को अलमारी में सजाना,
सच कहूँ तो अब तोहफ़ें खरीदने के वास्ते बाज़ारों में परेशान नहीं होती..

वो रोज़ का सजना-सवंरना ,और आईने को देख यूँही मुस्कुराना, 
सच कहूँ तो अब दर्पण में खुद का अक्स भी नहीं देख पाती…
वो तब के तुम्हारे लगे सचे कसमे वादें ,और साथ निभाने के इरादें,
सच कहूँ तो माँ कसम अब किसी पे यकीन नहीं कर पाती..
क्या करूँ , बस एक बार जो की मुहब्बत मैंने, अब दुबारा नहीं होती…. 
                                                                                                              kajal sky….

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