तुझ सी वो बात कहाँ से लाऊं मैं…..

तुझ सा कोई दिखे , ये तो मैं मानूं ,  

पर तुझ सी वो बात कहाँ से लाऊं मैं..

तेरा बोलना,बैठना,बतियाना,चलना 
होगी ये सारी अदाएँ किसी ओर में भी, 
पर तुझे देख होता वो सुकूँ , कहाँ से लाऊं मैं..

तुझसा स्पर्श हो सकता है , और भी, 
पर तेरी साँसो की ख़ुशबू की वो छटपटाहट 
 कहाँ से लाऊं मैं..

देखी नहीं पूरी दुनिया मैंने , ये भी मैं मानूं ,
पर ना होगा सारे जग में तुझसा कोई, ये भी मैं जानूं ..
तुझ सा कोई दिखे , ये तो मैं मानूं ,  

पर तुझ सी वो बात कहाँ से लाऊं मैं..
                                                  काजल  sky… 

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