आईना सामने और दिखती नहीं हूँ मैं…..

यहाँ होकर भी , यहाँ नहीं हूँ मैं,
आईना सामने और दिखती नहीं हूँ मैं..
मुस्कुरा के हालात-ए-ग़म सहेती हूँ यारो,
अब चिलाती चीखती नहीं हूँ मैं..
यही सोच कर उठाया था कागज़,
के हकीक़त-ए-ज़िन्दगी लिखदुं अपनी,
पर है हाथ में क़लम
और लिखती नहीं हूँ मैं..
                                    kajal sky….

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