तुम ठहेरे बेवफ़ा, मैं पागल दीवानी……

नासमझ हूँ, ना समझ पाऊँगी तुम्हे,

तुम ठहेरे बेवफ़ा,
मैं पागल दीवानी क्या समझ पाऊँगी तुम्हे..
कोशिश ही करती हूँ रोज़ ख़ुद को बदलने की ,
बख़ूबी जानती हूँ , ना बदल पाऊँगी तुम्हे..
दिल वो कागज़ है मेरा,
जो फट जायेगा, पर लिखावट मिटा ना पायेगा,
कोशिश बहोत की मैंने,
उफ़ कम्बख़त, भूल ना पाऊँगी तुम्हे..
नाकाम दुआएँ करती हूँ , आसमाँ को देख ,
क्या करूँ वादा किया है ख़ुद से,
 मेरा कर दिखाउंगी तुम्हे..
                                     kajal sky…. 

3 Comments

  1. admin चन्द्र भूषण सिंह 06/01/2013
  2. Sameer Bhartiya Sameer Bhartiya 11/01/2013
  3. pragya 17/01/2013

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