दिल मानता नहीं…..

दिल मानता नही इसे आदत है चोट खाने की….

कितनी दफ़ा कोशिश की हमने इसे समझाने की…..

बहुत कुछ सीखा है इसने तुमसे पर इक बात सीख ना पाया……

इसे आदत नहीं यूँ ही भूल जाने की…..

 

– गौरव संगतानी

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