तेरी याद में

दर्द की इंतहाँ हो गयी है यारों |

सुबह चले थे अब शाम हो गयी है यारों |

थक गयें हैं लेकिन कोई सहारा नहीं मिलता |

समंदर में मौजों को किनारा नहीं मिलता |

टूटा तो बहुत कुछ इस आसमां की झोली से |

इन पत्थरों में लेकिन कोई सितारा नहीं मिलता…”

 

– गौरव संगतानी

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