जिंदगी यूँ चली

जिंदगी यूँ चली, होके खुद से खफ़ा |

पाके भी खो दिया, हमने सब हर दफ़ा ||

कोई साथी नहीं, कोई संग ना चला |

दर्द की रह में, हँसी हुई बेवफा ||

– गौरव संगतानी

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