सोचा नहीं कभी हमने

सोचा नहीं कभी हमने,

क्यूँ दिल तुमबिन परेशां है |

क्यूँ सांसे उखड़ी उखड़ी हैं,

आँखें क्यूँ हैरान हैं ||

 

सोचा नहीं कभी हमने,

क्या रिश्ता ये अनजाना सा |

क्या डोर बांधें है हमको,

क्यूँ लगता सब अफसाना सा ||

 

सोचा नहीं कभी हमने,

क्या होगा जब तुम जाओगे |

खुद को ही खो देंगे हम,

तेरी यादों में ही खोएंगे ||

 

– गौरव संगतानी

Leave a Reply