एक मोहब्बत बेनाम

क्यूँ मसरूफ रहें हर वक्त, चंद लम्हें फुर्सत के भी बिताएं जाएँ |

क्यूँ हर रिश्ते का नाम हो, एक मोहब्बत बेनाम भी निभाई जाये ||

तेरा नाम न आ जाये जुबान पे, ये कहानी दिल में ही छुपाई जाये |

खुली आँखों से देखें हैं ख्वाब तेरे, एक रात जग के भी बितायी जाये ||

– गौरव संगतानी

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