कहीं किसी ओर ……

मैं ढूंढता रहा हूँ अब तक

कहाँ हो तुम

आओ चलें

कहीं किसी ओर

किसी आकाश के नीचे

किसी बदल के पीछे

आओ

मुहब्बत हमेशा जिन्दा रहती है

इस वाक्य कों चरितार्थ करें

हम और तुम

आओ

चलें कहीं किसी ओर 

हमारा और तुम्हारा साथ

बना रहेगा

तुम्हारे वादे कों जीवित रखें 

आओ

चले कहीं किसी ओर

आओ

बादलों कों ओढ लें

मुझे मालूम है

तरस रही होगी तुम बूंद बूंद कों

तेरी प्यास बढ़ गयी होगी

मेरे बगैर

लेकिन मैं भी तो….

आओ

सावन के बूंदों को पी लें

एक घूंट तुम

एक घूंट हम…

मुझे मालूम है

तुम थक गयी होगी

मगर तुम्हारी आँखे

अब भी

बह रही होगी

आओ

तुम्हारी आँखों कों बहने से रोकें

आओ चलें कहीं किसी ओर

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