मेरे गम को ही मेरा मरहम कर दे….

मुझे अपनी रह्मतो मे जम कर दे ,
मेरी आन्खो को और भी नम कर दे ,

कैसे काटून्गा वो तारीकीयो वाली शब ,
ए खुदा कब्र की जिन्दगी कम कर दे ,

छीन ले तु इख्तीयार-ए-नफ्स को मौला ,
मेरे गुनाहो का किस्सा खतम कर दे ,

तेरा ही दर है जहा झुकता रहा हु ,
सर-ए-तस्लीम को फिर आज खम कर दे ,

खुदा-ए-पाक तेरी रह्मत है बेमिसाल ,
मेरे गम को ही मेरा मरहम कर दे ,

ये मौका अता कर मेरे रब्बुल करीम ,
बलन्द हाथ मे इस्लाम-ए-परचम कर दे ,

निकाल कर कान्टो की जिन्दगी से खुदा ,
ईस खाकसार को अहले चमन कर दे !!

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