सर्वहारा किसान

सर्वहारा किसान

प्रसन्न होता है

लहलहाती फसल को

देखकर

लहलहाती फसल में

देखता है

अपना प्यारा नन्हा फूल

इच्छा है उसकी

जाए वह भी स्कूल

किसान देखता है

अपने सुनहरे

आने वाले पल को

मेहनतमय बनाना

चाहता है

जीवन के हर पल को

हर पल को वह

श्रम-जल बहाकर

जीना चाहता है

सबको देकर

बहार खुशी की

खुद गम का घूंट

पीना चाहता है

 

“गोपी”

Leave a Reply