देखा है

मैने रात को रन्ग बद्लते देखा है,
अन्धेरे के बाद सवेरा होते देखा है,
तिन्के बीना करते थे कभी धूप मे ,
आज खुद को बर्गद की च्हअव मे बैथे देखा है

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