ये दिन काफी नही ये रात काफी नही…

ये दिन काफी नही ये रात काफी नही ,
छोटी सी अपनी मुलाकात काफी नही ,

ए खुदा मुझे और जिन्दगी अता कर ,
मुहब्बत को भी ये हयात काफी नही ,

लहु से खुद लिखनी होगी दास्ता हमे ,
जबानी इजहार-ए-खयालात काफी नही ,

दिल की जमीन भिगे तो कोई बात बने ,
कतरा कतरा भी ये बरसात काफी नही ,

मुहब्बत का देवता है तो दरिया बन ,
थोडी थोडी सी ये खैरात काफी नही ,

सहराओ की खाक छानना चाहता हु ,
दर दर भटकने को सिरात काफी नही ,

जमाने को भी खबर हो मेरी मौत की ,
खामोश से हुई ये वफात काफी नही ,

यकबयक हुई जीत पे इतराना छोड दे ,
एक बार ये शय और मात काफी नही ,

क्या क्या नही नही दिया खुदा ने सबको ,
कैसे कहता है ये कायनात काफी नही ,

मर कर भी तो हिसाब देना है ‘शादाब’ ,
जिन्दगी से हुई ये नजात काफी नही !!

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