बडी मुश्कील से वो तय्यार हुआ है….

दामन मेरा भी अश्कबार हुआ है ,
जब जब कोई मेरा तलबगार हुआ है ,

जल्दी न गुज़र जाए ये शब कहीं ,
बड़ी मुश्कील से वो तय्यार हुआ है ,

तुने भी देखा है आसमां को आज ,
चान्द का मुझे भी दिदार हुआ है ,

गैर के पास अब ईसकी दवा कहाँ ,
दिल तुझे देख के ही बिमार हुआ है ,

हर लम्हा बदलती दुनिया मे ‘शादाब’ ,
अब तो जीना भी दुश्वार हुआ है !!

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