मेरी मय्यत के पिछे जमाना होगा….

जल कर खाक अगर परवाना होगा ,
तो शम्मा को भी दिल जलाना होगा ,

मौत तो बर हक है हम सभी पर ,
बस जुदा जुदा सबका फसाना होगा ,

लफ्जो पे उसे यकीन नही शायद ,
दिल चीर के जख्म दिखाना होगा ,

जब जब देखेगा तु खिलते गुलाब को ,
महसुस खुश्बु मे फसाना होगा ,

नये चेहरे तो बहुत होगे मगर ,
दास्तान-ए-इश्क वोही पुराना होगा ,

हर बात दिल लगी की भुला दी है लेकिन ,
यादो को भी जेहन से मिटाना होगा ,

शोहरत देगा ‘शादाब’ जब खुदा तो ,
मेरी मय्यत के पिछे जमाना होगा !!

2 Comments

  1. नादिर अहमद नादिर 18/09/2012

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