बिछड़ने का तुझको इमकान क्यूँ है….

इतने करीब तो हूँ फिर हैरान क्यूँ है ,
क्यूँ सोचता है ईतना परेशान क्यूँ है ,

हमें जुदा नहीं कर सकता कोई अब ,
बिछड़ने का तुझको इमकान क्यूँ है ,

कभी लौट कर नहीं आते जाने वाले ,
दहलीज़ पे लिखा ये फरमान क्यूँ है ,

तुझे मौत भी न आएगी मेरे बगैर ,
फिर मरने का तुझे अरमान क्यूँ है ,

तू सफर पे नहीं अगरचे “शादाब” ,
पास में दर्द का इतना सामान क्यूँ है ,

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