मिलते मिलते ये खैरात रह गई….

अधूरी अधूरी मुलाकात रह गई ,
मिटते मिटते भी हयात रह गई ,

तुम बिन मुश्किल है ज़िंदा रहना ,
कहते कहते भी ये बात रह गई ,

उसकी कुर्बत में शाद हो जाता मैं ,
मिलते मिलते ये खैरात रह गई ,

मंजिल का पता देते देते खुद ही ,
रेज़ा रेज़ा हो के ये सिरात रह गई ,

ज़म होना बाकी था तेरे ईश्क में ,
लरजती लरजती ये ज़ात रह गई ,

क्या हासिल हुआ अना से हमको ,
अकेली अकेली सारी रात रह गई ,

तेरी मुस्कुराहटों पे निसार हो कर ,
होते होते फजां ये निशात रह गई ,

एहसासों को समझ न पाया कभी ,
तरसती तरसती ये जज़्बात रह गई ,

चाँद को सितारों का तोहफा मिला ,
सुनी सुनी अपनी कायनात रह गई ,

बाद-ए-कज़ा भी न आया “शादाब” ,
तन्हा तन्हा अपनी वफात रह गई !!

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