जो न बहके वो जवानी नहीं है….

ये फसाना या कहानी नहीं है ,
ये बात ज्यादा पुरानी नहीं है ,

हर लम्हा याद आता है मुझे ,
मिटने वाली निशानी नहीं है ,

कहने को हजारों फूल हैं यहाँ ,
फिजां ये मगर सुहानी नहीं है !!

किसी बुज़ुर्ग ने कहा है शायद ,
जो न बहके वो जवानी नहीं है ,

हज़ार गम हो “शादाब” मगर ,
ये बात उसको बतानी नहीं है !!

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