नींद में भी आहट महसूस हुई….

कोई शज़र सायादार नहीं देखा ,
फजाओं में आबशार नहीं देखा ,

बाद-ए-तौबा भी सरजद हुआ ,
खुद जैसा गुनाहगार नहीं देखा ,

नींद में भी आहट महसूस हुई ,
हमने ऐसा इन्तेज़ार नहीं देखा ,

नज़र का वार ही काम कर गया ,
शिकारी ऐसा शिकार नहीं देखा ,

वख्त-ए-कज़ा आई तो चले गए ,
किसी को भी तय्यार नहीं देखा ,

ख्वारों पर ही यकीं है गुलों को ,
हमने ऐसा भी एतबार नहीं देखा ,

गुलशन-ए-ईश्क में आए “शादाब” ,
ऐसी फिजां ऐसा बहार नहीं देखा !!

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