वख्त भी ठहरा है बहुत….

वख्त भी ठहरा है बहुत ,
उसपे भी पहरा है बहुत ,

दर्द का मरहम न मिला ,
जख्म भी गहरा है बहुत ,

बेनूर है दरिया-ए-दिल ,
उदास भी सहरा है बहुत ,

हर आईने को देखा हमने ,
रुख पे भी चेहरा है बहुत ,

कैसे खुद को दूर करूँ मैं ,
नफ्स का कोहरा है बहुत !!

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