वो परिंदा किसी दूसरे शहर का है….

दर्द न टीस का है न लहर का है ,
पानी दरिया का है न नहर का है ,

शाम होते ही बिछड़ जाता है जैसे ,
वो परिंदा किसी दूसरे शहर का है ,

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