अच्छा किया जो नज़रों से गिरा दिया….

कोशिश करते तो कामयाब हो जाते ,
हम भी तेरे लिए दस्तयाब हो जाते ,

अच्छा किया जो नज़रों से गिरा दिया ,
आँखों में बसा लेता तो ख्वाब हो जाते ,

गुलों के साथ रहने में लुत्फ़ था मगर ,
काँटों के साथ रहते तो गुलाब हो जाते ,

ज़मीं पे किसी चराग की क्या बिसात ,
जो फलक पे रहते तो आफताब हो जाते ,

बादल ढकता है जैसे चाँद को अक्सर ,
तेरे रुख-ए-रौशन का हिजाब हो जाते ,

तेरे इकरार का इमकान रहा वरना हम ,
हर एक के सवालों का जवाब हो जाते ,

मिल जाती अगर तेरी कुर्बत हमें तो ,
हम भी तेरी तरह ‘शादाब’ हो जाते !!

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