ये चराग इतनी भी बेरहम क्यूँ है….

आँखों की ज़मीं आज नम क्यूँ है ,
ये चराग इतनी भी बेरहम क्यूँ है ,

आग मुसलसल जल रही है मगर ,
क्या हुआ धुंआ आज कम क्यूँ है ,

वफा जफा , वस्ल हिज्र , गम मौत ,
ईश्क में इतने पेच-ओ-ख़म क्यूँ है !!

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