तेरा ही हाथ था मेरा घर जलाने में….

मजबूरियों का फायदा उठाने में ,
सानी नहीं है तेरा कोई ज़माने में ,

चेहरा याद नहीं मगर यकीं हैं मुझे ,
तेरा ही हाथ था मेरा घर जलाने में ,

एक लम्हें में तुने उजाड़ दिया इसे ,
बरसों लगे हैं घर को घर बनाने में ,

याद नहीं मुझे अपनी मंजिल भी ,
खुद भटक गया हूँ पता बताने में ,

साकी तू आज बता ही दे मुझे ,
नशा पीने में है या पिलाने में !!

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