मेरे साथ चलना ही पड़ेगा….

ए शमा तुझे भी आज जलना ही पड़ेगा ,
गम के अंधेरों को निगलना ही पड़ेगा ,

आजमा मत के मेरी अज्म की खातीर ,
सूरज को रात में निकलना ही पड़ेगा ,

हर बात तेरी मानी है मगर अब नहीं ,
आज तुझे मेरे साथ चलना ही पड़ेगा ,

अपने अना के हिसारे से बाहर आकर ,
तुझे मेरे तसव्वुर में ढलना ही पड़ेगा ,

माना के वो है बहोत संग दिल मगर ,
उसको मेरी खातिर बदलना ही पड़ेगा ,

यही सूरत ठहरी जो तुझसे मिलने की ,
तब तो मुझे कांटो पे चलना ही पड़ेगा ,

करता हूँ वादा मगर तुम भी अहद करो ,
रंग-ए-हिना हाथों पे मलना ही पड़ेगा !!

Leave a Reply