पहचान तो लिया मगर हैरानी नहीं जाती….

दरिया खामोश हो तो रवानी नहीं जाती ,
बदजुबान की मगर बदजुबानी नहीं जाती ,

कौन सुनता है यहाँ फ़रियाद गरीबों की ,
ये वो आवाज़ है जो पहचानी नहीं जाती ,

यकीन नहीं होता तू ही है सामने मेरे ,
पहचान तो लिया मगर हैरानी नहीं जाती ,

शोहरत तो पल भर का तमाशा है बस ,
खाक में मिले फिर गुमनामी नहीं जाती ,

जब दोस्त ही बन जाए दुश्मन “शादाब” ,
दिल साफ़ भी हो तो बदगुमानी नहीं जाती !!

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