लैला का क्या हुआ…….

बात वोही थी जो सबको बताया गया ,
मगर मैं समझा नहीं जो समझाया गया ,

किसी ने ताजमहल बनाया याद के लिए ,
तो किसी को दीवारों में चुनवाया गया ,

लैला का क्या हुआ कोई जानता नहीं ,
हर कैस को पर सहरा में भटकाया गया ,

देश को बांटा तो तख़्त-ओ-ताज मिला ,
पर आज़ादी को फांसी पे लटकाया गया ,

छीन गए सारे अख्तियार भी अब तो ,
नया कानून जब देश में लगाया गया ,

जबां काट दी जायेगी बोलने वाले की ,
मैंने सुना जब किसी को सुनाया गया !!

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