कब वो ज़माना आएगा….

कब वो दौर कब वो ज़माना आएगा ,
जब शमा को बचाने परवाना आएगा ,

थक तो गया हूँ मैं मगर रुक जाउंगा ,
जब तेरी राह में कोई मैखाना आएगा ,

हर वो निगाह मेरी ही जानिब उठेगी ,
जब तेरी बज़्म में ये दीवाना आएगा ,

मेरे ही अफ़साने का तू ज़िक्र करेगा ,
जब होठों पे तेरे कोई तराना आएगा ,

नये लोग तो यहाँ बहुत मिले “शादाब” ,
मगर याद वोही शख्स पुराना आएगा !!

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