शादाब’ हैं तो सबको ‘शादाब’ करते हैं….

सहरा को भी दरिया-ए- सैलाब करते हैं ,
काँटों को भी खिलता गुलाब करते हैं ,

हम छोटे बड़े सबको आदाब करते हैं ,
शादाब’ हैं तो सबको ‘शादाब’ करते हैं !!

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