बेख्याली में उसने मेरा नाम कह दिया….

एक सुबह कह दिया एक शाम कह दिया ,
यूँ किस्सा हमने उनको तमाम कह दिया ,

पूछा किसी ने जो मुस्कुराहटों का सबब ,
बेख्याली में उसने मेरा नाम कह दिया ,

ये नवाजिश है उसकी फराख दिली का ,
सागर ले के आया और जाम कह दिया ,

हाथों को मेरे थाम के वो आज ये बोला ,
पूरा करो जो मैंने अहकाम कह दिया ,

पूछा उसने क्या होगा ईस कहानी का ,
देखेंगे जो होगा मैंने अंजाम कह दिया ,

तोलना जो चाहा वो मेरी मुहब्बत को ,
अनमोल है इसका मैंने दाम कह दिया ,

ले जाओ अपने दिए सारे तोहफे मगर ,
मत ले जाना दर्द का सामान कह दिया ,

वो है तो अपनी तकदीर में “शादाब” ,
क्यूँ मैंने खुद को नाकाम कह दिया !!

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