मैं नाचीज़ हूँ मेरी हस्ती नहीं है….

ये दयार नहीं है ये बस्ती नहीं है ,
मैं नाचीज़ हूँ मेरी हस्ती नहीं है ,

उसकी तस्वीर देख कर चूमता हूँ ,
मुहब्बत है ये बुत परस्ती नहीं है ,

आती है सावन की घटाएं बन के ,
गरजती तो है पर बरसती नहीं है ,

सिवा-ए-खुदा मैं डरता नहीं किसी से ,
ये कहते हुए जबां लरजती नहीं है !!

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