किसने कहा मौसम है खिजाओं का….

जबां कुछ कहने से पहले लरजती हैं ,
कश्तियाँ रोज़ साहिल को तरसती हैं ,

किसने कहा मौसम है खिजाओं का ,
मेरी आँखें तो शब्-ओ-रोज़ बरसती हैं !!

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