ईश्क फिरकों में बटी जागीर देखी हमने….

हर ख्वाब की अलग ताबीर देखी हमने ,
सबसे जुदा अपनी तकदीर देखी हमने ,

मुकम्मल जहां नहीं मिलता किसी को ,
हर रांझे से अलग होती हीर देखी हमने ,

ज़ात का सलीका कभी उम्र का तकाजा ,
ईश्क फिरकों में बटी जागीर देखी हमने ,

ईस जरा सा नकाब जो हटाया उसने फिर ,
हुस्न क्या कमाल-ए-जहांगीर देखी हमने ,

मुस्कुराहट में भी कुछ गम था शायद ,
उसके चेहरे पे ऐसी तहरीर देखी हमने ,

दुआ करता है सारी रात तू मेरे लिए ,
तेरी अज्म तो बहुत कदीर देखी हमने ,

यकीनन पा लूँगा “शादाब” मुकद्दर से उसे ,
अपने हाथों पे आज वो लकीर देखी हमने !!

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