मैं सहरा हूँ के समन्दर वख्त बताएगा……..

वख्त तो गुज़रता है गुज़र जाएगा ,
तू आज भी मुझे शब् भर जगाएगा ,

उदास न होना तू हम मिलेंगे जरूर ,
के यही बेदर्द ज़माना हमें मिलाएगा ,

तू अभी से मेरे सब्र का इम्तेहां न ले ,
मैं सहरा हूँ के समन्दर वख्त बताएगा ,

मेरे चारागर दवा का एहतेमाम न कर ,
ज़ख्म गहरा तो है मगर भर जायेगा ,

एक बार वो आ जाएँ मेरे घर “शादाब” ,
खुशबु होगी चाँद ज़मीं पे उतर आएगा !!

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