मिट जायेगा सब दुनिया फानी है……..

ये बात लगती तो पुरानी है ,
पर अपनी तो यही कहानी है ,

जो ना ढले वो गम है अपना ,
जो ढल जाए वो ही जवानी है ,

ख्वाब जो पलकों पे थे ठहरे हुए ,
बाहर आये तो कहते हैं पानी है ,

क्या लाया था जो लेकर जाएगा ,
मिट जायेगा सब दुनिया फानी है ,

शऊर आया लिखने का “शादाब” ,
ये किसी और की मेहरबानी है !!

Leave a Reply