कुछ पा लिया है तो अब कुछ खोना है……

कुछ पा लिया है तो अब कुछ खोना है ,
अना को ज़ब्त के समन्दर में डुबोना है ,

टूट न जाए किसी पत्थर से मकां उनका ,
शीशे के घर वालों का भी यही रोना है ,

खिलौनों के टूट जाने का अफ़सोस कैसा ,
दिल भी तो तेरे हाथों का एक खिलौना है ,

क्या करें जब सबा कोई पैगाम न लाई ,
होगा तो वोही जो मुकद्दर में होना है ,

दुनिया की शोहरत खुशी मुबारक हो तुझे ,
मेरे लिए मुफलिसी ही मेरा बिछौना है ,

बहुत काट चुके हम नफरत के फसल यहाँ ,
मुश्किल सही पर मुहब्बत के बीज बोना है ,

एक लम्हे का ही वो आसरा देता “शादाब” ,
मुझे जुल्फों के साये में कुछ देर सोना है !!

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