उन्हें फुर्सत नहीं दुनिया के काम से……

उन्हें फुर्सत नहीं दुनिया के काम से ,
सोचते हैं हम भी हैं बड़े आराम से ,

दुश्मनी ही सही अपनी मैखाने से मगर ,
कुछ रिश्ता तो है साकी तेरे जाम से ,

आगाज़ तो अच्छा हुआ बहुत मगर ,
डर लगता है कभी कभी अंजाम से ,

देखती नहीं कहती नहीं सुनती भी नहीं है ,
अब क्या कहूँ मैं ईस देश की अवाम से ,

खिजाओं का नाम “शादाब” कैसे रक्खूं ,
मुझे नफरत होती है अपने ही नाम से !!

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