दरमियां अब फासलों की दिवार कहाँ है….

दरमियां अब फासलों की दिवार कहाँ है ,
कश्ती तो मिल गई मगर पतवार कहाँ है ,

दिल की बस्ती उजाड़ने वाले ये बता दे ,
अब कहाँ जाएँ हम हमारा घर बार कहाँ है ,

आज सवाल किया वीरान खिजाओं ने हमसे ,
बता कल जो महकती थी वो बहार कहाँ है ,

एक उम्र भटकते रहे चारागर की तलाश में ,
पर न जाने आज कल वो बीमार कहाँ है ,

पीने को तो लोग लहू भी पी लेते हैं “शादाब” ,
तिशनगी मेरी जो बुझाए वो आबशार कहाँ है !!

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