देख क्या मिलता है दुआओं में फ़कीर से……

कुछ हासील तो हुआ तेरी तस्वीर से ,
अब कोई गिला नहीं अपनी तकदीर से ,

मैं सोचता रहा के कदम क्यूँ नहीं बढते ,
तुने बाँध जो रक्खा है जुल्फों की जंजीर से ,

ज़र्फ से बढ़ कर देने का हौसला तो रख ,
देख क्या मिलता है दुआओं में फ़कीर से ,

हकीकत तो है ही मुकद्दर अपना मगर ,
कुछ और भी मिले ख़्वाबों की ताबीर से ,

सिर्फ रिश्ता ही नहीं रखना है तुझको ,
मैं जोड़ना चाहता हूँ हाथों की लकीर से !!

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