तेरी यादें ही काफी हैं मुस्कुराने को…….

हकीकत बनाना है एक फसाने को ,
अज्म दिखाना है अपना जमाने को ,

जब मौत भी दस्तक दे कर पलट गई ,
तो अब बचा ही क्या है आजमाने को ,

मुसलसल खामोशी होती है तेरे सामने ,
वैसे तो बातें बहुत हैं तुझे बताने को ,

कोई लम्हा गमज़दा हुआ नहीं “शादाब” ,
तेरी यादें ही काफी हैं मुस्कुराने को !!

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