बिकने के लिए ही हम बाजार निकले….

एतबार वाले थे वो बेएतबार निकले ,
अयादत करने वाले ही बीमार निकले ,

बहुत शौक था खरीद ले कोई हमें भी ,
बिकने के लिए ही हम बाजार निकले ,

मोहसीन बचा न कोई खरीदने वाला ,
जो दुश्मन थे वो ही खरीदार निकले ,

बाज़ार-ए-ज़ीनत थे तो अच्छे थे “शादाब” ,
घर ले कर आये तो हम बेकार निकले !!

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