वो बोला नज्मों में मेरा ज़िक्र आता क्यूँ है….

वो बोला नज्मों में मेरा ज़िक्र आता क्यूँ है ,
मैंने कहा तू मुझसे रुठ कर जाता क्यूँ है ,

वो बोला तेरी बातें मुझे समझ नहीं आती ,
मैंने कहा जज़्बात कभी समझाई नहीं जाती ,

वो बोला तू मुझे कभी पागल सा लगता है ,
मैंने कहा जमाना तेरा आँचल सा लगता है ,

वो बोला तुम मुझे भूल क्यूँ नहीं जाते हो ,
मैंने कहा कोशीश करूँ तो और याद आते हो ,

वो बोला मेरे दिल में भी है मुहब्बत थोड़ी ,
मैंने कहा इसी सहारे गुजरेगी जिंदगी पूरी ,

वो बोला कभी मिलने नहीं देगा जमाना हमें ,
मैंने कहा मर के भी याद आएगा ये फसाना हमें ,

वो बोला तुमसे हम ज़रूर मुलाक़ात करेंगे ,
मैंने कहा तुम मिल जाओ तो पूरी बात करेंगे ,

वो बोला फिर हम मुलाक़ात को जबान देते हैं ,
मैंने कहा इसी बात पे हम अपनी जान देते हैं !!

Leave a Reply